इसका पुनर्मुद्रण के बजाय इसका द्वितीय संस्करण प्रकाश में लाया जा सकता था लेकिन सारा प्रयास ज्योतिषशास्त्र बृहत्कोश में लगा है। यथाशीघ्र यह बृहत्कोश पाठकों के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास किया जा रहा है। जिसमें ज्योतिष शास्त्र के सभी स्कन्धों के पारिभाषिकों के शब्दार्थ एवं आवश्यकतानुसार लघु निबन्ध भी होंगे। इसकी एक और विशेषता होगी कि इसमें सम्प्रति उपलब्ध ग्रन्थ
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